अस्थमा क्या होता है? इन्हेलर क्या होता है? इन्हेलर का इस्तेमाल कैसे करें

हमारे जीवन में कोई ना कोई व्यक्ति ऐसा होता है जिसकी अचानक से साँस फूलने लगती है, और वो कोई पम्प से दवा लेता है और सही हो जाता है। इस बीमारी को आम बोलचाल की भाषा में दमा कहते हैं और डॉक्टरों की भाषा में अस्थमा कहते हैं। 
अब सवाल ये उठता है कि दमा(अस्थमा) होता क्या है? दमा के लक्षण क्या होते हैं? दमा किस व्यक्ति को हो सकता है? दमा का इलाज व बचाव क्या होते हैं? चलिए ये सब जानते हैं इस लेख में:

अस्थमा क्या होता है? इन्हेलर क्या  होता है? इन्हेलर का इस्तेमाल कैसे करें
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दमा क्या होता है: 

  1. दमा फेफड़ों की एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज़ को कुछ समय के लिए साँस में तकलीफ़ होती है और दवा लेने पर ठीक हो जाती है। 
  2. साँस लेने में तकलीफ़ इसलिए होती है क्योंकि साँस नलिकाओं में कुछ देर के लिए सूजन आ जाती है या वो सिकुड़ जाते हैं। 
  3. दमा की तकलीफ़ मौसम बदलने पर, व्यायाम करने पर और रात के समय बढ़ सकती है। 

दमा के लक्षण: 

दमा के मरीज़ को निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं
  1. साँस छोड़ने में तकलीफ़ 
  2. छाती में भारीपन या जकड़न 
  3. साँस छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज़(wheeze) आना
  4. खाँसी होना
  5. रात में सोते सोते साँस में तकलीफ़ या खाँसी के कारण आँख खुल जाना
  6. मौसम बदलने पर जुकाम हो जाना या नाक बहना
  7. बहुत ज़्यादा छींकें आना
  8. साल में ज़्यादातर समय हल्का फुल्का जुकाम बने रहना
  9. सुबह सुबह जगते ही बहुत सारी छींकें एक साथ आना
अस्थमा क्या होता है? इन्हेलर क्या  होता है? इन्हेलर का इस्तेमाल कैसे करें
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अस्थमा किसको हो सकता है? 

वैसे तो अभी तक ये पूरी तरह पता नहीं लग पाया है कि अस्थमा या दमा किस व्यक्ति को प्रभावित करते हैं परंतु ये पाया गया है कि दमा उन लोगों में ज़्यादा होता है जिनके: 
  1. परिवार में किसी को दमा है, यदि माता या पिता में किसी को है तो दमा होने की संभावना बहुत ज़्यादा होती है
  2. परिवार में किसी को या स्वयं को किसी प्रकार की एलर्जी है 
  3. आसपास की वायु बहुत प्रदूषित है
  4. व्यवसायिक स्थल पर एलर्जी करने वाले पदार्थों का बाहुल्य है

अस्थमा के कारण क्या होते हैं?

दमा के कारण भी अभी तक पूरी तरह नहीं पता चल पाए हैं परंतु दमा के प्रमुख कारण जो डॉक्टर बताते हैं वो निम्नलिखित हैं:
  1. जीन संबंधी (अभी तक वो जीन नहीं पता लगाया जा सका है जो दमा के लिए ज़िम्मेदार है, परंतु ये परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है इसलिए माना जाता है कि जीन स्तर पर कुछ है जो दमा का कारण बनता है) 
  2. प्रदूषण 
  3. व्यवसाय जिनमें बहुत ज़्यादा कैमिकल इस्तेमाल होते हैं 
  4. कुछ दवाइयाँ भी दमा कर सकती हैं जैसे beta blockers
  5. एलर्जी
  6. मोटापा 
  7. कुछ लोगों में व्यायाम भी दमा का कारण होता है। 
  8. धूम्रपान

कौन सी बीमारियों के साथ अस्थमा भी पाया जा सकता है:

  1. हे फीवर (Hay fever)
  2. खुजली (eczema)
  3. एलर्जी
  4. एलर्जिक राइनाइटिस(allergic rhinitis) 

कैसे पता करें कि अस्थमा का दौरा पड़ा है: 

दमा के लक्षण हमेशा नहीं होते हैं, कुछ समय के पश्चात सही हो जाते हैं तो हमें किसी व्यक्ति को देखकर समझ आ जाना चाहिए कि व्यक्ति को अस्थमा को दौरा पड़ा है, कैसे पहचान सकते हैं कि जो लक्षण हैं वो दमा के हैं: 
  1. अचानक से साँस फूलने लगना
  2. साँस छोड़ने में ज़्यादा समस्या होना
  3. सीने में जकड़न महसूस करना 
  4. बहुत ज़्यादा खाँसी होना
  5. बहुत ज़्यादा पसीना आ जाना 
  6. रात को सोते सोते अचानक से खाँसने लगना

अस्थमा की जाँच(निदान) कैसे की जाती है?

दमा का पता लगाने के लिए कोई भी जाँच बहुत कारगर नहीं होती है क्योंकि इसमें फेफड़ों में किसी तरह का कोई संरचना परिवर्तन नहीं होता है। ये एक क्रियात्मक बीमारी है जिसमें व्यक्ति को जब दमा को दौरा पड़ता है तब थोड़ी देर के लिए श्वास तंत्र की नलिकाएँ सिकुड़ जाती हैं और बाद में एक दम सामान्य हो जाती हैं। इसलिए मुख्यतः लक्षणों से ही पता किया जाता है कि व्यक्ति को अस्थमा है या नहीं। 

अस्थमा की जाँच: स्पाइरोमेट्री (Spirometry) 

  1. इसमें एक मशीन होती है जिसमें मरीज़ को गहरी साँस लेकर ज़ोर से ६ सेकेंड तक लगाकर फूंक मारने के लिए बोलते हैं।
  2. मशीन पहले सेकंड में बाहर की ओर फूंकी गई हवा और फेफड़ों में भरी कुल हवा का अनुपात लेकर बताती है कि मरीज़ के फेफड़ों में कुल हवा भरने की क्षमताओं कमी हुई है या श्वास तंत्र में कोई रुकावट है। 
  3. दमा या अस्थमा में फेफड़ों की क्षमता सामान्य होती है और श्वास तंत्र के रास्तों में रुकावट होती है।
  4. ये अच्छी जाँच है परंतु इससे एकदम नहीं कहा जा सकता कि ये दमा ही है क्योंकि रूकावट का कोई और कारण भी हो सकता है। 

दमा(अस्थमा) का इलाज क्या है? 

दमा का कोई स्थाई इलाज नहीं होता है, केवल दमा के दौरे के समय पर लक्षणों को नियंत्रित करके मरीज़ को लाभ पहुँचाया जा सकता है और लक्षणों के प्रकट होने की संभावना को कम किया जा सकता है। 

अस्थमा को कैसे नियंत्रित करें: 

  1. एलर्जी के कारकों को पहचानें और उनसे बचें। एलर्जी किसी से भी हो सकती है जैसे किसी भोजन से, धूल, किसी पालतू जानवर से।
  2. मोटापा, टौंसिल के बढ़ने, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का इलाज करवाएँ 
  3. नियमित दवाइयाँ लें

अस्थमा के इलाज में कौन सी दवाइयाँ इस्तेमाल होती हैं

दमा के मरीज़ों में श्वास नलिकाओं में संकुचन की समस्या होती है और सबसे ज़्यादा मरीज़ एलर्जी के होते है, इसलिए इसके इलाज में जो दवाइयाँ इस्तेमाल होती हैं वो निम्नलिखित हैं
  1. एलर्जी को कम करने वाली जैसे कि antihistamines drugs, anticholinergic drugs
  2. श्वास नलिकाओं का संकुचन समाप्त करने वाली दवाइयाँ जैसे कि beta receptor agonists
  3. Steroids जो कि लम्बे समय से फेफड़ों में चल रही प्रतिक्रियाओं को रोकते हैं और एलर्जी के असर को भी कम करते हैं। 

Beta agonist drugs:

Beta agonist drugs वो दवाइयाँ हैं जो कि श्वास नलिकाओं की दीवारों पर उपस्थित बीटा रिसेप्टर (beta receptor) से जुड़ कर माँसपेशियों को शिथिल कर देती हैं। 
ये दो प्रकार की होती हैं 
  1. कम समय के लिए सक्रिय रहने वाले
  2. लम्बे समय तक सक्रिय रहने वाले

दमे का दौरा पड़ने पर कम समय तक सक्रिय रहने वाले beta agonist drugs और steroids दिए जाते हैं 
और एक बार लक्षण समाप्त हो जाने के बाद मरीज़ को लम्बे समय तक सक्रिय रहने वाले beta agonist drugs और steroids दिए जाते हैं जिसको दिन में एक या दो बार लेना होता है, इससे मरीज़ को अस्थमा के दौरे पड़ने कम हो जाते हैं और वो सामान्य ज़िन्दगी जी सकता है। 

अस्थमा में इस्तेमाल होने वाले इन्हेलर क्या होते हैं? 

अस्थमा क्या होता है? इन्हेलर क्या  होता है? इन्हेलर का इस्तेमाल कैसे करें
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अस्थमा की दवाइयाँ देने के लिए मुख्यतः दो रास्ते अपनाए जाते हैं 
  1. गोलियाँ खाना 
  2. इन्हेलर

गोलियाँ खाना: 

गोलियाँ खाने में आसान होती हैं परंतु जो दवाइयाँ मुँह से देते हैं वो जाकर रक्त में मिलती हैं और फिर काम शुरु करती हैं तो इनके तीन मुख्य नुक़सान होते हैं: 
  1. देर से काम करती हैं
  2. शरीर के दूसरे अंगों पर दुष्प्रभाव होते हैं जिससे मरीज़ की दवा कई बार बंद करनी पड़ती है। 
  3. बड़ी मात्रा में दवा देनी पड़ती है

इन्हेलर: 

ये एक ऐसा यंत्र होता है जिसके द्वारा अस्थमा के मरीज़ों को सीधे श्वास तंत्र में दवाइयाँ दी जा सकती हैं, ये दवाइयाँ सीधे श्वास तंत्र में जाकर काम करती हैं इसलिए इनके लाभ निम्नलिखित हैं:
  1. तेज़ी से काम करती हैं, कुछ सेकेंड्स में ही मरीज़ को आराम मिलने लगता है।
  2. बहुत कम मात्रा में दवा देनी पड़ती है 
  3. सीधे श्वास तंत्र में काम करने की वजह से दूसरे अंगों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव बहुत कम हो जाते हैं। 


इन्हेलर का इस्तेमाल कैसे करते हैं? 

इन्हेलर दो प्रकार के होते हैं: 
  1. पम्प जिनसे दवा की निश्चित मात्रा पम्प दबाने पर बाहर आती है और सीधे श्वास तंत्र में प्रवेश कर जाती है।
  2. सूखे पाउडर वाले इन्हेलर जिनमें कि दवा एक कैप्सूल में होती है।

 पम्प इन्हेलर का इस्तेमाल कैसे करें: 

  • इन्हेलर का वो भाग जो मरीज़ के मुँह से जुड़ना है उसको मुँह के अंदर लेकर होंठों से कसकर दबाया जाता है और पम्प मारा जाता है। 
  • जब दवा पम्प से बाहर आती है तभी गहरी गहरी २-३ साँसें ली जाती हैं जिससे कि ज़्यादा से ज़्यादा दवा श्वास तंत्र में प्रवेश कर जाए। 
  • इन्हेलर सूंघने के बाद १०-१५ सेकेंड तक मुँह बंद रखना चाहिए। 
  • ५-१० मिनट बाद साफ़ पानी से कुल्ला अवश्य करें। 

सूखे पाउडर वाला इन्हेलर कैसे इस्तेमाल करें?

  • मशीन में कैप्सूल डालकर तोड़ लें 
  • मुँह से अच्छी तरह इन्हेलर को लगा कर होंठों को कसकर पकड़ें 
  • एक गहरी साँस खींचें
  • इन्हेलर मुँह से अलग करके १०-१५ सेकेंड तक मुँह बंद रखें उसके १०-१५ मिनट बाद साफ़ पानी से कुल्ला अवश्य करें। 

दमा से बचाव कैसे करें

  • सबसे पहले अपने वो कारक पहचानें जो आपको दमा का दौरा ले आते हैं उनसे बचे रहें
  • ठंड से बचें
  • धूम्रपान ना करें
  • प्रदूषण से बचें
  • निरंतर दवा लेते रहें
  • वजन कम करें

निष्कर्ष:

अस्थमा एक बहुत सामान्य तौर पर पाई जाने वाली बीमारी है और इसका पूरी तरह इलाज सम्भव नहीं है केवल नियंत्रण किया जा सकता है। इस लेख में हमने जाना कि अस्थमा क्या होता है? अस्थमा की रोकथाम कैसे करें? इन्हेलर क्या होता है और इन्हेलर का इस्तेमाल कैसे करते हैं! 
उम्मीद करते हैं कि आपकी जानकारी बढ़ी होगी पढ़कर जल्दी ही अगले लेख के माध्यम से और जानकारियाँ देने की कोशिश करेंगे। 



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