गर्भावस्था का एनीमिया (Anaemia in Pregnancy): कारण, शिशु पर प्रभाव और एनीमिया का इलाज

  


क्या आपकी पत्नी गर्भवती हैं? या आप खुद गर्भवती हैं?  या आपके परिवार में कोई गर्भवती है? तो ये पोस्ट आपके लिए है। और हाँ यदि कोई गर्भवती महिला नहीं भी है परिवार में तो भी आपको ये पोस्ट पढ़नी ही चाहिए। जानते हैं क्यों? क्योंकि मैं जिस विषय पर बात करने जा रहा हूँ वो आज देश में एक गम्भीर समस्या है, और हर व्यक्ति को इस विषय की जानकारी होनी ही चाहिए जिससे कि वो परिवार या मित्र की सहायता कर सके। इस पोस्ट को लिखने का उद्देश्य ही जागरूकता लाना है। चलिए फिर शुरुआत करते हैं और जानते हैं गर्भावस्था में होने वाले एनीमिया के विषय में। 

गर्भावस्था का एनीमिया:



गर्भावस्था में यदि किसी महिला का हीमोग्लोबिन ११ ग्राम/डेसीलीटर से कम है तो उसको एनीमिया माना जाता है। 

सामान्यतः महिलाओं के लिए हीमोग्लोबिन की निम्न सीमा १२ ग्राम/डेसीलीटर होती है। 

एनीमिया का वर्गीकरण: 


गर्भावस्था के अनीमिया को ४ श्रेणियों में बाँटा जाता है। 

हल्का एनीमिया: 

यदि महिला का हीमोग्लोबिन स्तर १० ग्राम/डेसीलीटर से लेकर १०.९ ग्राम/ डेसीलीटर है।

मध्यम एनीमिया: 

यदि महिला का हीमोग्लोबिन स्तर ७ ग्राम/डेसीलीटर से लेकर ९.९ ग्राम/डेसीलीटर तक है। 

गम्भीर एनीमिया: 

यदि महिला का हीमोग्लोबिन स्तर ४ ग्राम/डेसीलीटर से लेकर ६.९ ग्राम/डेसीलीटर तक है

अति गम्भीर एनीमिया:

यदि महिला का हीमोग्लोबिन स्तर ४ ग्राम/डेसीलीटर से कम है। 

गर्भावस्था में एनीमिया इतना ज्यादा क्यों होता है? 

गर्भावस्था में सबसे ज़्यादा होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में अनीमिया का स्थान सबसे ऊपर है और ये मुख्यतया आयरन की कमी से होने वाला अनीमिया होता है। परंतु सवाल ये है कि क्यों इतना ज़्यादा होता है ये? इसके दो प्रमुख कारण होते हैं 
  1. गर्भ में पल रहे भ्रूण में जो हीमोग्लोबिन बनता है उसके लिए आवश्यक आयरन माँ के शरीर से ही निकाला जाता है जिसके कारण गर्भावस्था में शरीर में आयरन की कमी होने लगती है और यदि अतिरिक्त आयरन ना दिया जाए भोजन में तो अनीमिया हो जाता है। 
  2.  गर्भावस्था में रक्त प्लाज़्मा की मात्रा लगभग ४५% बढ़ जाती है ( प्रेगनेंसी के पूर्व के सापेक्ष) परंतु लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा प्रेगनेंसी के पूर्व मात्रा से केवल ३०% ही बढ़ती है जिस कारण यदि देखा जाए तो प्रति डेसीलीटर रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं या हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाती है। 
अन्य कारण: 
  1. भोजन में कम आयरन खाना
  2. ऐसे भोजन जिनसे शरीर बहुत कम आयरन अवशोषित कर पाता है। 
  3. अत्यधिक चाय या कॉफी पीना
  4. मलेरिया या टीबी जैसी बीमारियाँ 
  5. पेट में कीड़े होना
  6. आवश्यकता से कम विटामिन B12 एवं फोलिक एसिड का सेवन करना।

गर्भावस्था में पाये जाने वाले एनीमिया के प्रकार: 

गर्भावस्था का अनीमिया क्या होता है?

  1. आयरन की कमी से होने वाला अनीमिया 
  2. विटामिन B12 की कमी से होने वाला अनीमिया 
  3. फोलिक एसिड की कमी से होने वाला अनीमिया
  4. थैलेसेमिया एवं अन्य अनुवांशिक अनीमिया 

गर्भावस्था में एनीमिया के कारण बच्चे पर क्या दुष्प्रभाव होते हैं? 

एक माँ जो अनीमिया से ग्रस्त है उसका गर्भ सामान्य आकार से काफ़ी छोटा होता है और वजन भी समय के सापेक्ष होता है जिसके कारण निम्नलिखित परिस्थितियाँ हो सकती हैं: 
  1. गर्भ नाल का आकार सामान्य से कम रह जाना
  2. समय से पूर्व पैदा होना
  3. बालक के शारीरिक विकास पर दुष्प्रभाव होना
  4. जन्म से पहले, जन्म के दौरान अथवा जन्म के तुरंत बाद मृत्यु हो जाना
  5. कम उम्र में मृत्यु हो जाना
यहाँ आपको ये ज़रूर जानना चाहिए कि अनीमिया ना केवल बच्चे के लिए हानिकारक है बल्कि माँ के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। जिन माँओं में गर्भावस्था के दौरान अनीमिया की समस्या रहती है उनमें मृत्यु दर सामान्य से कई गुना ज़्यादा होती है। 

गर्भावस्था में एनीमिया की पहचान के लिए कौन कौन सी जाँचें करवाना ज़रूरी है:

  1. हीमोग्लोबिन स्तर( haemoglobin level) 
  2. सीरम आयरन ( serum iron)
  3. सीरम फेरिटिन ( serum ferritin)
  4. आयरन को बांधने की कुल क्षमता (total iron binding capacity)
  5. विटामिन B12 का रक्त में स्तर
  6. इनके अलावा अनुवांशिक एनीमिया के लिए जाँच तब करवायी जाती है जब कि ऊपर दी गई  अन्य जाँचें सामान्य आ जाएँ पर केवल हीमोग्लोबिन कम हो या युगल में से किसी के परिवार में इस तरह के अनीमिया का इतिहास हो। 

एनीमिया का इलाज: 

अनुवांशिक अनीमिया के लिए अब तक कोई बहुत संतोषजनक इलाज नहीं आया है, जो इलाज अभी उपलब्ध हैं जैसे अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण ( BONE MARROW TRANSPLANTATION) या जीन प्रत्यारोपण ( GENE THERAPY)  ये अत्यधिक महँगे हैं और बहुत क्लिष्ट प्रक्रियाएँ हैं जो एक गर्भवती महिला पर करना सम्भव नहीं है। 

यहाँ हम आयरन व विटामिन B12 की कमी से होने वाले अनीमिया का इलाज जानेंगे। 

आयरन की कमी वाला एनीमिया: 


गर्भावस्था के १४-१६ हफ़्ते में: 


यदि हीमोग्लोबिन ११ ग्राम/ डेसीलीटर से अधिक है:

आयरन और फोलिक एसिड की एक गोली रोज़ सुबह ख़ाली पेट १०० दिन तक देनी है जिसमें कि १०० मिलीग्राम आयरन हो और ०.५ मिलीग्राम फोलिक एसिड हो। 

यदि हीमोग्लोबिन ७-१०.९ ग्राम/ डेसीलीटर है: 

आयरन और फोलिक एसिड की एक गोली सुबह और एक गोली शाम १०० दिन तक देनी है 

यदि हीमोग्लोबिन ७ ग्राम/डेसीलीटर से कम है: 

मरीज़ को भर्ती करके खून चढ़ाना चाहिए 

गर्भावस्था के २०-२४ हफ़्ते के बीच: 

यदि हीमोग्लोबिन ११ ग्राम/डेसीलीटर से अधिक है: 

आयरन फोलिक एसिड की एक गोली रोज़ सुबह ख़ाली पेट देनी है

यदि हीमोग्लोबिन ९-१०.९ ग्राम/डेसीलीटर है: 

आयरन और फोलिक एसिड की एक गोली सुबह और एक गोली शाम को देनी है

यदि हीमोग्लोबिन ७-८.९ ग्राम/डेसीलीटर है: 

आयरन सुक्रोज का इंजेक्शन नस के द्वारा लगाना है, जिसके लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना है: 
  1. १०० मिलीग्राम आयरन सुक्रोज को १०० मिलीलीटर नॉर्मल सलाइन में मिलाकर क़रीब आधा घंटे में चढ़ाना है। 
  2. हर ३-४ दिन के अंतराल पर दो हफ़्ते में देना चाहिए 
  3. आयरन की गोली बंद कर देनी चाहिए जब तक कि अगली हीमोग्लोबिन स्तर की रिपोर्ट ना आ जाए
  4. विटामिन की गोलियाँ बंद करने की आवश्यकता नहीं होती है। 

यदि हीमोग्लोबिन ७ ग्राम/डेसीलीटर से कम है: 

मरीज़ को भर्ती करके खून चढ़ाने की आवश्यकता है। 

गर्भावस्था के २६-३० हफ़्ते के बीच: 


यदि हीमोग्लोबिन ११ ग्राम/डेसीलीटर से अधिक है: 

आयरन फोलिक एसिड की एक गोली रोज़ सुबह ख़ाली पेट देनी चाहिए 

यदि हीमोग्लोबिन ९-१०.९ ग्राम/डेसीलीटर है: 

आयरन फोलिक एसिड की एक गोली सुबह और एक गोली शाम को देनी चाहिए। 

यदि हीमोग्लोबिन ७-८.९ ग्राम/डेसीलीटर है: 

  1. यदि माँ को आयरन के इंजेक्शन पहले लगे हुए हैं तो दो और इंजेक्शन १०० मिलीग्राम आयरन सुक्रोज के लगाने हैं ४ दिन के अंतराल पर
  2. यदि माँ को पहले कोई इंजेक्शन नहीं लगा है तो आयरन के ४ इंजेक्शन ४-४ दिन के अंतराल पर २ हफ़्ते में लगाने हैं

यदि हीमोग्लोबिन ७ ग्राम/डेसीलीटर से कम है तो: 

मरीज़ को भर्ती करके खून चढ़ाने की आवश्यकता है। 

गर्भावस्था के ३०-३४ हफ़्ते के बीच: 

हीमोग्लोबिन यदि ११ ग्राम/डेसीलीटर से अधिक है: 

तो आयरन फोलिक एसिड की एक गोली देते रहना है

यदि हीमोग्लोबिन ९-१०.९ ग्राम/डेसीलीटर से कम है: 

आयरन फोलिक एसिड की एक गोली सुबह और एक गोली शाम को देनी है

यदि हीमोग्लोबिन ९ ग्राम/डेसीलीटर से कम है: 

मरीज़ को भर्ती करके जाँच करके हीमोग्लोबिन ना बढ़ने के कारण पता करने चाहिए और खून चढ़ाना चाहिए। 

आपको लग रहा होगा कितना मुश्किल है ये सब! पर यक़ीन मानिए बहुत आसान है। एक आम इंसान के तौर पर हमें पता होना चाहिए कि डॉक्टर के कहे अनुसार हमें आयरन की गोलियाँ निरंतर देते रहना है और कुछ परिस्थितियों में यदि डॉक्टर खून चढ़ाने की आवश्यकता बताते हैं तो संकोच नहीं करना है। ऊपर दिए गये विवरण से आप खुद भी पता कर सकते हैं कि मरीज़ को खून की आवश्यकता है या नहीं। 

विटामिन B12 एवं फोलिक एसिड की कमी से होने वाला एनीमिया: 


  1. WHO के मुताबिक़ एक गर्भवती महिला को प्रतिदिन ४०० माइक्रोग्राम फोलेट व ४-६ माइक्रोग्राम विटामिन B12 लेना चाहिए। 
  2. ये मात्रा आसानी से विटामिन की गोलियों द्वारा दी जा सकती है। 
  3. विटामिन की गोलियाँ प्रेगनेंसी कीं शुरूआत से ही शुरू हो जानी चाहिए और अंतिम सप्ताह तक चलनी चाहिए। 

एनीमिया से बचाव के लिए खाद्य पदार्थों की सूची: 


आयरन: 

  1. गुड
  2. लोहे की कढ़ाई में पकी हुई सब्ज़ियाँ 
  3. हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ 
  4. काजू
  5. अखरोट इत्यादि

विटामिन B12: 

विटामिन B12  माँसाहारी भोजन में प्रचुर मात्रा में मिलता है जैसे

  1. चिकिन, 
  2. मछली इत्यादि
ये विटामिन शाकाहारी भोजन में नहीं मिलता इसलिए विटामिन की गोलियाँ अलग से खानी पड़ती हैं

फोलिक एसिड: 


  1. हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ 
  2. भिंडी
  3. संतरा इत्यादि 

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स्रोत: 





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