एनस्थिसिया क्या होता है? एनस्थिसिया कितने प्रकार का होता है? एनस्थिसिया कैसे देते हैं? एपीड्यूरल एनस्थिसिया क्या होता है? Anaesthesia in hindi

क्या कभी आपका या आपके किसी जानने वाले का ऑपरेशन हुआ है? ऑपरेशन के दौरान दर्द महसूस हुआ? नहीं ना? ये कमाल है एनस्थिसिया का। आइए जानते हैं कि एनस्थिसिया क्या होता है? एनस्थिसिया कितने प्रकार का होता है? एनस्थिसिया कैसे देते हैं और एनस्थिसिया के साइड इफ़ेक्ट क्या होते हैं

एनस्थिसिया क्या होता है?

anaesthesia kya hota he
एनस्थिसिया चिकित्सा विज्ञान की एक ऐसी विधा है जिसमें दवाओं के द्वारा व्यक्ति को दर्द मुक्त किया जा सकता है और उसको बेहोश किया जा सकता है। एनस्थिसिया को हिन्दी में संज्ञा हरण या निश्चेतना विज्ञान कहते हैं। एनस्थिसिया के पाँच मूलभूत तत्व होते हैं 
  1. दर्द निवारण 
  2. संज्ञा हरण
  3. मांसपेशियों की शिथिलता
  4. ऑपरेशन के समय की याददाश्त जाना
  5. ऑपरेशन की चिन्ता से मुक्ति

पूर्ण संज्ञाहरण (GENERAL ANAESTHESIA)  

  1. इस तकनीक में मरीज़ को पूर्ण रूप से बेहोश किया जाता है, मरीज़ को साँस लेने की मशीन पर रखा जाता है और ऑपरेशन के बाद मरीज़ को होश में लाया जाता है। 
  2. पूर्ण संज्ञाहरण में मरीज़ को ऑपरेशन के दौरान की कोई भी याददाश्त नहीं होती है। 
  3. मरीज़ का शरीर पूरी तरह से शिथिल होता है कोई भी अंग नहीं हिलता है 
  4. मरीज़ को कृत्रिम तरीक़े से साँस दी जाती है

आंशिक संज्ञाहरण (REGIONAL ANAESTHESIA)

  1. इस तकनीक में शरीर का कोई एक हिस्सा दवा देकर सुन्न कर दिया जाता है।
  2. मरीज़ पूरी तरह होश में रहता है। 
  3. मरीज़ शरीर का कोई भी अंग हिला सकता है सिवाय उस अंग के जो कि सुन्न किया गया है। 
  4. मरीज़ स्वयं से साँस लेता है। 

एनस्थिसिया में प्रयोग होने वाली दवाइयाँ: 

एनस्थिसिया में प्रयोग होने वाली दवाओं के विषय में बताने के पहले एक बात बताना चाहूँगा कि ये दवाइयाँ सामान्य दवाइयाँ नहीं होती हैं और इनका प्रयोग जानलेवा हो सकता है, ये दवाइयाँ केवल प्रशिक्षित एनस्थिसिया डॉक्टर के द्वारा पर्याप्त संसाधनों के बीच प्रयोग की जानी चाहिए। 
एनस्थिसिया में प्रयोग होने वाली दवाओं को दो भागों में बाँटते हैं 
  1. पूर्ण संज्ञाहरण की दवाएँ 
  2. आंशिक संज्ञाहरण की दवाएँ। 

पूर्ण संज्ञाहरण की दवाएँ: 

इनको भी दो भागों में बाँटा गया है।

साँस द्वारा दी जाने वाली दवाइयाँ :

ये मरीज़ के शरीर में गैस की अवस्था में प्रवेश करती हैं और गैस की अवस्था में ही वापस बाहर आती हैं। जैसे कि: 
  1. नाइट्रस ऑक्साईड 
  2. हैलोथेन
  3. आइसोफ्लूरेन
  4. सीवोफ्लूरेन

नस द्वारा दी जाने वाली दवाइयाँ :

इन दवाओं को नस द्वारा शरीर में प्रवेश करवाया जाता है, शरीर के अंदर ही इनका अपचयों होता है और अपशिष्ट पदार्थों के साथ शरीर से निकासी होती है।जैसे कि:
  1. प्रोपोफोल
  2. कीटामिन
  3. थायोपेंटोन

आंशिक संज्ञाहरण की दवाइयाँ: 

इन दवाइयों को रक्तवाहिकाओं में नहीं दिया जा सकता है।  
इन दवाओं को तंत्रिकाओं के आस पास के क्षेत्रों भर दिया जाता है जिससे कि तंत्रिकाएँ धीरे धीरे इनको अवशोषित करती हैं और सुन्न हो जाती हैं। उदाहरण के लिए 
  1. ब्युपिवाकेन
  2. लिग्नोकेन

आंशिक एनस्थिसिया के प्रकार: 

  1. लोकल एनस्थिसिया  
  2. एपीड्यूरल एनस्थिसिया 
  3. स्पाइनल एनस्थिसिया 
  4. नर्व(nerve block) ब्लॉक

लोकल एनस्थिसिया क्या होता है? 

लोकल एनस्थिसिया, आंशिक संज्ञाहरण का ही एक प्रकार है इसमें दवाओं को त्वचा में या बहुत छोटे क्षेत्रों में इंजेक्शन के द्वारा भर दिया जाता है और इससे उतने जगह की त्वचा सुन्न हो जाती है। 

लोकल एनस्थिसिया के उपयोग: 

  1. ऑपरेशन के बाद घाव बंद करने के टाँकों का दर्द कम करने के लिए 
  2. किसी भी फोड़े से पस निकालना यदि फोड़ा बहुत छोटा है और त्वचा के ऊपरी सतह तक ही फैला है। 
  3. कान छेदने के लिए 
  4. छोटे ऑपरेशन जिनमें कम दर्द होता है। 

एपीड्यूरल एनस्थिसिया क्या होता है? 

हमारी रीढ़ की हड्डी के बीचोंबीच केन्द्रीय तंत्रिका होती है जो दिमाग़ से शुरु होकर लगभग पूरी रीढ़ की हड्डी के अंदर होती है इसको मेरुदंड कहते हैं। मेरुदंड और रीढ़ की हड्डी के बीच एक ख़ाली स्थान होता है जहाँ से तंत्रिकाएँ गुजरती हैं इसी स्थान पर एक नलिका डालकर सुन्न करने की दवा डाली जाती है। 
दवा धीरे धीरे तंत्रिकाएँ अवशोषित कर लेती हैं और सुन्न हो जाती हैं जिससे संदेशों का प्रवाह रूक जाता है और कमर तथा कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न हो जाता है।

एपीड्यूरल एनस्थिसिया के उपयोग: 

  1. आजकल एपीड्यूरल का इस्तेमाल ऑपरेशन के बाद के दर्द को रोकने में ज़्यादा होता है जिन ऑपरेशन में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं वो हैं- पैरों का कोई भी ऑपरेशन, पेट के ऑपरेशन
  2. बिना दर्द के डिलीवरी
  3. पैरों के ऑपरेशन जैसे घुटना प्रत्यारोपण, कूल्हे का प्रत्यारोपण 
  4. नाभि के नीचे पेट का कोई ऑपरेशन जैसे हर्निया। 

 

स्पाइनल एनस्थिसिया क्या होता है? 

मेरुदंड को चोट से बचाने के लिए प्रकृति ने उसके चारों ओर तरल पदार्थ भरा हुआ है, इसी तरल में तंत्रिकाएँ मेरुदंड से निकलती हुई गुजरती हैं और विभिन्न अंगों तक जाती हैं। 

स्पाइनल एनस्थिसिया के उपयोग: 

स्पाइनल और एपीड्यूरल एनस्थिसिया के उपयोग एक जैसे ही होते हैं केवल एक फ़र्क़ होता है कि दर्द रहित प्रसव में स्पाइनल एनस्थिसिया को अब इस्तेमाल नहीं किया जाता। तो मुख्यतः निम्नलिखित प्रयोग हैं :

  1. पैरों का कोई भी ऑपरेशन
  2. नाभि के नीचे पेट का कोई ऑपरेशन

नर्व(Nerve block) ब्लॉक:

शरीर में कई तंत्रिका तंत्र बनते हैं जो अलग अलग अंगों को संदेश भेजते हैं और उनको संदेश केंद्रीय तंत्र तक ले जाते हैं। 
इस तकनीक में इन्हीं तंत्रों को ढूँढ कर इनके आस पास दवा डाल दी जाती है जिसको ये अवशोषित कर लेते हैं और संदेशों का आवागमन रुक जाता है। 

एनस्थिसिया कौन दे सकता है? 

भारत सरकार के नियमों के अनुसार केवल प्रशिक्षित डॉक्टर जिसने कि भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान से MBBS के बाद MD एनस्थिसियोलॉजी, DNB एनस्थिसियोलॉजी या इनके समकक्ष शिक्षा प्राप्त की हो। 
वो व्यक्ति जिसके पास उपरोक्त में से कोई अर्हता नहीं है, यदि वो एनस्थिसिया देता है तो ये क़ानूनन जुर्म है। 

anaesthesia in hindi


एनस्थिसिया कैसे देते हैं? 

एनस्थिसिया देने कि प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि मरीज़ को पूर्ण एनस्थिसिया देनी है या आंशिक एनस्थिसिया, दोनों  प्रक्रियाएँ अलग अलग हैं आइए एक एक करके जानते हैं: 

पूर्ण संज्ञाहरण की विधि: 

  1. सर्वप्रथम मरीज़ व उसके रिश्तेदार से ऑपरेशन एवं एनस्थिसिया के लिए लिखित अनुमति ली जाती है
  2. मरीज़ को ऑपरेशन टेबल पर लिटाकर ब्लड प्रेशर, ECG, व ऑक्सीजन की मात्रा देखने के लिए ऑक्सीमीटर लगाया जाता है, जिन्हें वाइटल मॉनिटर कहते हैं। 
  3. मरीज़ को १००% ऑक्सीजन देना शुरु करते हैं और ३ मिनट तक ऑक्सीजन दी जाती है
  4. घबराहट कम करने के लिए दवा देते हैं, फिर बेहोश करने वाली दवाइयाँ दी जाती हैं
  5. गले में साँस की नली डाली जाती है और मरीज़ को साँस की मशीन से जोड़ दिया जाता है जो नियमित अंतराल पर साँस देती रहती है। 
  6. इसके बाद ऑपरेशन शुरु होता है और मरीज़ पर एनस्थिसिया के डॉक्टर हर पल नज़र रखते हैं और मरीज़ को कोई भी दिक़्क़त नहीं होने देते हैं। 
  7. जब ऑपरेशन पूरा हो जाता है तब मरीज़ को होश में लाया जाता है और मरीज़ जब अच्छी तरह साँस लेने लगता है तब मरीज़ की साँस की नली निकाल दी जाता है और मरीज़ को ऑपरेशन कक्ष के बाहर रिकवरी कक्ष में लिटाया जाता है।
anaesthesia kese dete hain

आंशिक संज्ञाहरण की विधि: 

  1. मरीज़ एवं रिश्तेदार से ऑपरेशन तथा एनस्थिसिया की अनुमति ली जाती है
  2. मरीज़ को ऑपरेशन टेबल पर लिटाकर वाइटल  मॉनिटर लगाए जाते हैं
  3. जिस भाग का ऑपरेशन होना है, उस भाग से संदेश लेकर जाने वाली तंत्रिकाओं के आसपास के क्षेत्रों में सुन्न करने वाली दवाइयाँ डाल दी जाती हैं। 

एनस्थिसिया के साइड इफ़ेक्ट: 

पुराने ज़माने में एनस्थिसिया बहुत ख़तरनाक होता था बहुत सारे लोग अपनी जान खो देते थे एनस्थिसिया के दौरान परंतु आज कल ज़्यादा सुरक्षित दवाइयाँ आ गई हैं, ज़्यादा अच्छी देखभाल कर सकने वाले मॉनिटर आ गए हैं तो एनस्थिसिया के दौरान की मृत्यु दर २/१००००० ऑपरेशन के आसपास आ गई है। सुरक्षित एनस्थिसिया के बावजूद कुछ दिक़्क़तों का सामना मरीज़ को करना पड़ सकता है: 
  1. दवाओं का रिएक्शन 
  2. उल्टी हो जाना
  3. ऑपरेशन के बाद गले में दर्द ( पूर्ण संज्ञाहरण के बाद)
  4. किसी तंत्रिका का चोटग्रस्त हो जाना 
  5. दिल की धड़कन अचानक से रूक जाना ( ये लाखों करोड़ों मरीज़ों में १-२ बार होता है) 
एनस्थिसिया के दुष्प्रभाव अधिकतर उन्हीं लोगों में होते हैं जिनको गम्भीर बीमारियाँ होती हैं जैसे कि अनियंत्रित डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप

निष्कर्ष: 

एनस्थिसिया पुराने जमाने में काफ़ी ख़तरनाक होता था परंतु आज कल बहुत सुरक्षित हो गया है। पहले हर हज़ार लोगों में जिनको एनस्थिसिया दिया जाता था उनमें से २-३ लोग अपनी जान खो देते थे परंतु अब लाखों लोगों में से किसी एक के साथ इस तरह का हादसा होता है। 
इस लेख में हमने जाना कि एनस्थिसिया क्या होता है? एनस्थिसिया कैसे देते हैं? एनस्थिसिया के कितने प्रकार होते हैं और लोकल एनस्थिसिया क्या होता है? 
लेखक ने पूर्ण प्रयास किया है कि एनस्थिसिया से जुड़े सभी सवालों के उत्तर लेख में सम्मिलित किए जाएँ, फिर भी यदि आपका कोई प्रश्न अनुत्तरित रह गया है तो कृपया कमेंट में बताएँ या e-mail करें। 

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