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Showing posts from 2020

पिट्युटरी या पीयूष ग्रंथि: संरचना एवं हॉर्मोन

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 पिट्युटरी या पीयूष ग्रंथि को शरीर के ग्रंथि तंत्र का हैड मास्टर कहा जाता है, पर ऐसा क्यों है? चलिए जानते हैं कि पिट्युटरी के विषय में सब कुछ:  पिट्युटरी ग्रंथि क्या होती है?  हमारे दिमाग़ के नीचे एक मटर के आकार की ग्रंथि होती है जिसका वजन ०.५ ग्राम होता है इसको ही पीयूष ग्रंथि कहते हैं।  ये माना जाता है कि इसका निर्माण हाइपोथैलेमस से ही होता है।  इसके दो भाग होते हैं:  अग्र भाग पश्च भाग ( ये भाग हाइपोथैलेमस से जुड़ा होता है) ग्रंथि की शरीर में स्थिति:  पीयूष ग्रंथि हमारी खोपड़ी में दिमाग़ के सबसे निचले हिस्से में पाई जाती है।  खोपड़ी की हड्डी में इसके लिए एक गड्ढे नुमा स्थान होता है जिसको “ पिट्युटरी फोसा (pituitary fossa) ”कहते हैं।  चारों तरफ़ से जिस हड्डी से घिरी रहती है उसको “ सेला टर्सिका(cella turcica) ” कहते हैं।  ग्रंथि एक झिल्ली से ढकी हुई रहती है जिसको “ डायफ्रामा सेल्ली (diaphragma cellae) ” कहते हैं।  पिट्युटरी ग्रंथि के कार्य:  यह शरीर में होने वाली लगभग सभी गतिविधियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित करता है जिनमें प्रमुख हैं:  शरीर की वृद्धि एवं विकास ब्लड प्

ग्रंथियाँ क्या होती हैं? ग्रंथियाँ कितने प्रकार की होती हैं? Endocrine Glands in Hindi

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आपने कभी सुना होगा कि शरीर में ग्रंथियाँ या glands होती हैं, जो अलग अलग काम करती हैं, परंतु क्या आपको पता है ग्रंथि क्या होती है? ग्रंथि का शरीर में क्या काम है? यदि कोई ग्रंथि ठीक से काम ना करें तो क्या होगा? इन सब सवालों के उत्तर मिलेंगे इस लेख में।  ग्रंथि क्या होती है?  शरीर के वो भाग जो कोई ऐसे जैविक रसायन उत्पन्न करते हैं, जो शरीर की नित प्रतिदिन की प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं, इन भागों या शरीर के अंगों को ही ग्रंथि कहते हैं। शरीर में मुख्यतः दो प्रकार की ग्रंथियाँ पाई जाती हैं: बर्हिस्रावी ग्रंथियाँ   अंत:स्रावी ग्रंथियाँ  बर्हिस्रावी ग्रंथियाँ:  ये वो ग्रंथियाँ हैं जिनमें नलिकाएँ पाई जाती हैं, जिनके माध्यम से अपने जैविक रसायनों अपने बाहर निकालकर छोड़ देती हैं, जो एपीथिलियम पर निकलते हैं,  इनके उदाहरण निम्नवत हैं:  पसीने को बाहर निकालने वाली ग्रंथियाँ  लार ग्रंथि स्तन ग्रंथियाँ जिनमें बच्चे के लिए दूध बनता है और स्रावित होता है अश्रु ग्रंथियाँ  प्रोस्टेट ग्रंथि अंत:स्रावी ग्रंथियाँ:  इन ग्रंथियों में कोई नलिका नहीं होती हैं ये अपने रसायन सीधे रक्त में छोड

एप्लास्टिक अनीमिया: कारण, लक्षण, इलाज

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 दोस्तों आज जिस विषय पर हम बात करेंगे वो एक ऐसा विषय है जिसके विषय में हमने थोड़ा कम सुना होता है पर सुना होता है। वो है एप्लास्टिक एनीमिया। तो चलिए फिर शुरू करते हैं और जानते हैं कि एप्लास्टिक एनीमिया क्या होता है? इसके क्या क्या कारण हैं? और इसका इलाज क्या है? एप्लास्टिक एनीमिया:  एप्लास्टिक एनीमिया एक ऐसा अनीमिया है जिसमें कि शरीर के अंदर रक्त कोशिकाओं का निर्माण होना बंद हो जाता है या इतना कम हो जाता है जो शरीर की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी नहीं होता है।  सबसे ज़रूरी सवाल ये है कि ऐसा होता क्यों है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें ये जानना पड़ेगा कि रक्त कोशिकाओं का निर्माण कहाँ होता है और किन परिस्थितियों में ये कम हो जाता है।  अस्थि मज्जा:  रक्त कोशिकाओं का निर्माण हमारे शरीर की अस्थि-मज्जा में होता है।  अस्थि-मज्जा शरीर की बड़ी बड़ी हड्डियों के अंदर मिलता है, ये बच्चों में ज़्यादा होता है और बड़ों में केवल कुछ जगहों पर ही क्रियाशील होता है बाक़ी जगहों पर अस्थि मज्जा की जगह वसा एकत्र हो जाती है। अस्थि मज्जा में रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है एवं वहीं से वो रक्त में मि

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन: जानिए आपकी हेल्थ आईडी क्या काम करेगी?

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  राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन: 15 अगस्त 2020 को लाल क़िले की प्राचीर से जब प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित किया तो उसमें आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ योजनाएँ थीं उनमें से एक योजना थी  राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन । चलिए इसके विषय में जानते हैं।  राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत सरकार की योजना है कि तकनीक को स्वास्थ्य योजनाओं में जोड़ा जाए जिससे कि मरीज़ों का रिकॉर्ड रखने में आसानी हो और एक क्लिक पर डॉक्टर जान पाएँ कि मरीज़ को पहले क्या बीमारी थी और उसने कितने समय तक कहाँ कहाँ इलाज लिया।  यह डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जिस पर सभी भारतीय व्यक्तिगत रूप से पंजीकृत होंगे और सभी को यूनिक हेल्थ आईडी प्रदान की जाएगी। हालाँकि ये अभी योजना का प्रारूप है और सरकार जल्द ही इस योजना का शुभारंभ करेगी।  इस प्रणाली के स्तंभ क्या हैं: इस प्रणाली के चार प्रमुख स्तंभ होंगे 1. स्वास्थ्य आईडी, 2. व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड, 3. डिजी डॉक्टर और 4. स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री। स्वास्थ्य आईडी एक डिजिटल "स्वास्थ्य खाता" जैसा होगा जिसमें उपयोगकर्ता के सभी विवरण होंगे जैसे उपयोगकर्ता के व्य

गर्भावस्था का एनीमिया (Anaemia in Pregnancy): कारण, शिशु पर प्रभाव और एनीमिया का इलाज

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   क्या आपकी पत्नी गर्भवती हैं? या आप खुद गर्भवती हैं?  या आपके परिवार में कोई गर्भवती है? तो ये पोस्ट आपके लिए है। और हाँ यदि कोई गर्भवती महिला नहीं भी है परिवार में तो भी आपको ये पोस्ट पढ़नी ही चाहिए। जानते हैं क्यों? क्योंकि मैं जिस विषय पर बात करने जा रहा हूँ वो आज देश में एक गम्भीर समस्या है, और हर व्यक्ति को इस विषय की जानकारी होनी ही चाहिए जिससे कि वो परिवार या मित्र की सहायता कर सके। इस पोस्ट को लिखने का उद्देश्य ही जागरूकता लाना है। चलिए फिर शुरुआत करते हैं और जानते हैं  गर्भावस्था में होने वाले एनीमिया के विषय में।  गर्भावस्था का एनीमिया: गर्भावस्था में यदि किसी महिला का हीमोग्लोबिन ११ ग्राम/डेसीलीटर से कम है तो उसको एनीमिया माना जाता है।  सामान्यतः महिलाओं के लिए हीमोग्लोबिन की निम्न सीमा १२ ग्राम/डेसीलीटर होती है।  एनीमिया का वर्गीकरण:  गर्भावस्था के अनीमिया को ४ श्रेणियों में बाँटा जाता है।  हल्का एनीमिया:  यदि महिला का हीमोग्लोबिन स्तर १० ग्राम/डेसीलीटर से लेकर १०.९ ग्राम/ डेसीलीटर है। मध्यम  एनीमिया:  यदि महिला का हीमोग्लोबिन स्तर ७ ग्राम/डेसीलीटर से लेकर ९.९ ग्राम/डेसील

एनीमिया क्या होता है? एनीमिया के प्रकार और लक्षण

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दोस्तों एक बात आप सब लोग सुनते होंगे अपने आस पास कि फ़लाँ आदमी को एनीमिया हो गया है या फ़लाँ महिला को खून की कमी हो गई है। हम में से ज़्यादातर लोग जानते हैं कि एनीमिया शरीर में रक्त की कमी को कहते हैं। पर क्या वाक़ई केवल रक्त की कमी ही एनीमिया है या फिर इसकी और भी परिभाषाएँ होती हैं !   इस लेख में और आने वाले दो लेखों में हम एनीमिया के विषय में सब कुछ जानेंगे। इस विषय पर आपके जो भी सवाल होंगे मैं उन सभी का उत्तर देने की कोशिश करूँगा , वो भी बहुत आसान भाषा में।   इस लेख में मैं आपको   एनीमिया की परिभाषा , एनीमिया के प्रकार , एनीमिया के कारण , एनीमिया के लक्षण एवं आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया   के विषय में बताऊँगा।   एनीमिया क्या होता है ?  हम सब जानते हैं कि एनीमिया का अर्थ होता है :   1.    रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी 2.    रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी परंतु चिकित्सा विज्ञान के हिसाब से एनीमिया का अर्थ होता