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अब बच्चे को स्तनपान कराने वाली माँ को भी मिलेगी वैक्सीन। कोरोना होने के कितने दिन बाद वैक्सीन लगवा सकते हैं?। covid vaccination guidelines in hindi

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कोरोना वैक्सीन से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब: कोरोना वैक्सीन को लेकर बहुत सारे सवाल लोगों के मन में चल रहे हैं कि कब लगवाएँ कैसे लगवाएँ, कोरोना होने के कितने दिन बाद लगवाएँ, वैक्सीन की एक डोज़ के बाद कोरोना हो गया तो दूसरी डोज़ कब लगवाएँ? इसी तरह के महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जानेंगे इस पोस्ट में।  वैक्सीन रजिस्ट्रेशन के लिए यहाँ क्लिक करें 1. भारत में कितनी वैक्सीन उपलब्ध हैं:   भारत में अभी ३ वैक्सीन अप्रूव्ड हैं १) ऑक्सफ़ोर्ड एस्ट्राजेनेका की “कोविशील्ड” जिसका निर्माण सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया कर रहा है, (२) भारत बायोटेक व ICMR  द्वारा विकसित और निर्मित “कोवैक्सिन” (३) रुस द्वारा विकसित “स्पुतनिक-V” भारत में जिसका निर्माण डॉ रेड्डी लैब कम्पनी करेगी। इन तीन में कोविशील्ड व कोवैक्सिन भारत में अभी लग रही हैं और स्पुतनिक की १.५ लाख डोज़ आयातित की गई हैं कुछ समय बाद इनका निर्माण भारत में होगा।  2. वैक्सीन किसको लगाई जा सकती है?  १८ साल से ऊपर के सभी लोगों को वैक्सीन लगा सकते हैं 3. क्या गर्भवती महिला व स्तनपान करवाने वाली महिलाएँ वैक्सीन लगवा सकती हैं?  १९/०५/२०२१ को जारी पत्

म्यूकरमाइकोसिस क्या है? ब्लैक फ़ंगस क्या होता है?। कोरोना के मरीज़ों में ब्लैक फ़ंगस क्यों हो रहा है?। Black fungus in hindi

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आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में है, बहुत सारे लोग इसकी चपेट में आकर अपना जीवन भी गँवा चुके हैं। अब जब वायरस का प्रकोप धीरे धीरे कम होता जा रहा है, तो एक नयी समस्या आ धमकी है, जिसको म्यूकरमाइकोसिस या ब्लैक फ़ंगस के नाम से जाना जा रहा है। चलिए जानते हैं कि ये म्यूकरमाइकोसिस क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और इसके कारण क्या हैं? म्यूकरमाइकोसिस:  मूयकरमाइकोसिस एक फ़ंगस द्वारा होने वाली बीमारी है, जो कि उन व्यक्तियों में होती है, जिनकी इम्युनिटी किसी भी कारण से कम हो गई है इस बीमारी के लिए ज़िम्मेदार फ़ंगस का नाम: म्यूकरमाइसिडीज (Mucormycedes)  म्यूकरमाइसिडीज के कण जिनको स्पोर्स (spores) कहते हैं वो सामान्यतः मिट्टी में, हवा में, यहाँ तक कि हमारे शरीर में उपस्थित रहते हैं ख़ासकर नाक में परंतु सामान्य व्यक्ति में ये बीमारी पैदा नहीं कर पाते हैं क्योंकि शरीर की इम्युनिटी के कारण ये अपनी संख्या नहीं बढ़ा पाते हैं। परंतु जब इम्युनिटी कमजोर पड़ती है तब ये बीमारी का रूप ले लेते हैं।  म्युकरमाइकोसिस के लिए ज़िम्मेदार बीमारियाँ या परिस्थितियाँ:  डायबिटीज़ एड्स कैंसर स्टीरॉइड्स का अत्यधिक इस्

मतिभ्रम: कारण, इलाज। hallucination in Hindi। हैल्युसिनेशन या मतिभ्रम कोरोना का लक्षण हो सकता है

मतिभ्रम क्या है? मतिभ्रम या हैल्युसिनेशन क्या है? मतिभ्रम जैसे कि शब्द से पता चल रहा है कि किसी प्रकार का भ्रम है, इसमें हमें उन चीज़ें का आभास होता है जो वास्तव में हमारे आसपास होती ही नहीं हैं।  यह एक मानसिक बीमारी हो सकती है जिसे स्किज़ोफ्रेनिया कहा जाता है, तंत्रिका तंत्र की समस्या जैसे पार्किंसंस रोग, मिर्गी, या कई अन्य परिस्थितियों में ये हो सकता है।  यदि आपको या किसी प्रियजन को मतिभ्रम है, तो एक डॉक्टर से मिलें और उपचार प्राप्त करें। इस स्थिति का उपचार इस पर निर्भर करता है कि मतिभ्रम के लिए ज़िम्मेदार समस्या क्या है? यदि वे समस्या आसानी से नियंत्रित की जा सकती है तो आपकी मतिभ्रम एकदम सही हो सकता है परंतु यदि समस्या को आसानी से नियंत्रित नहीं हो सकती है तो मतिभ्रम को सही कर पाना काफ़ी मुश्किल होता है।  मतिभ्रम के कारण:  मानसिक विकार: इस बीमारी वाले 70% से अधिक लोगों को दृश्य मतिभ्रम होता है, और 60% -90% आवाज सुनते हैं। लेकिन कुछ ऐसी चीजों को भी सूंघ और स्वाद ले सकते हैं जो वहां नहीं हैं। पार्किंसंस:  जिन लोगों की यह स्थिति है उनमें से आधे तक कभी-कभी ऐसी चीजें दिखाई देती हैं जो वह

पिट्युटरी या पीयूष ग्रंथि: संरचना एवं हॉर्मोन

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 पिट्युटरी या पीयूष ग्रंथि को शरीर के ग्रंथि तंत्र का हैड मास्टर कहा जाता है, पर ऐसा क्यों है? चलिए जानते हैं कि पिट्युटरी के विषय में सब कुछ:  पिट्युटरी ग्रंथि क्या होती है?  हमारे दिमाग़ के नीचे एक मटर के आकार की ग्रंथि होती है जिसका वजन ०.५ ग्राम होता है इसको ही पीयूष ग्रंथि कहते हैं।  ये माना जाता है कि इसका निर्माण हाइपोथैलेमस से ही होता है।  इसके दो भाग होते हैं:  अग्र भाग पश्च भाग ( ये भाग हाइपोथैलेमस से जुड़ा होता है) ग्रंथि की शरीर में स्थिति:  पीयूष ग्रंथि हमारी खोपड़ी में दिमाग़ के सबसे निचले हिस्से में पाई जाती है।  खोपड़ी की हड्डी में इसके लिए एक गड्ढे नुमा स्थान होता है जिसको “ पिट्युटरी फोसा (pituitary fossa) ”कहते हैं।  चारों तरफ़ से जिस हड्डी से घिरी रहती है उसको “ सेला टर्सिका(cella turcica) ” कहते हैं।  ग्रंथि एक झिल्ली से ढकी हुई रहती है जिसको “ डायफ्रामा सेल्ली (diaphragma cellae) ” कहते हैं।  पिट्युटरी ग्रंथि के कार्य:  यह शरीर में होने वाली लगभग सभी गतिविधियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित करता है जिनमें प्रमुख हैं:  शरीर की वृद्धि एवं विकास ब्लड प्

ग्रंथियाँ क्या होती हैं? ग्रंथियाँ कितने प्रकार की होती हैं? Endocrine Glands in Hindi

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आपने कभी सुना होगा कि शरीर में ग्रंथियाँ या glands होती हैं, जो अलग अलग काम करती हैं, परंतु क्या आपको पता है ग्रंथि क्या होती है? ग्रंथि का शरीर में क्या काम है? यदि कोई ग्रंथि ठीक से काम ना करें तो क्या होगा? इन सब सवालों के उत्तर मिलेंगे इस लेख में।  ग्रंथि क्या होती है?  शरीर के वो भाग जो कोई ऐसे जैविक रसायन उत्पन्न करते हैं, जो शरीर की नित प्रतिदिन की प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं, इन भागों या शरीर के अंगों को ही ग्रंथि कहते हैं। शरीर में मुख्यतः दो प्रकार की ग्रंथियाँ पाई जाती हैं: बर्हिस्रावी ग्रंथियाँ   अंत:स्रावी ग्रंथियाँ  बर्हिस्रावी ग्रंथियाँ:  ये वो ग्रंथियाँ हैं जिनमें नलिकाएँ पाई जाती हैं, जिनके माध्यम से अपने जैविक रसायनों अपने बाहर निकालकर छोड़ देती हैं, जो एपीथिलियम पर निकलते हैं,  इनके उदाहरण निम्नवत हैं:  पसीने को बाहर निकालने वाली ग्रंथियाँ  लार ग्रंथि स्तन ग्रंथियाँ जिनमें बच्चे के लिए दूध बनता है और स्रावित होता है अश्रु ग्रंथियाँ  प्रोस्टेट ग्रंथि अंत:स्रावी ग्रंथियाँ:  इन ग्रंथियों में कोई नलिका नहीं होती हैं ये अपने रसायन सीधे रक्त में छोड

एप्लास्टिक अनीमिया: कारण, लक्षण, इलाज

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 दोस्तों आज जिस विषय पर हम बात करेंगे वो एक ऐसा विषय है जिसके विषय में हमने थोड़ा कम सुना होता है पर सुना होता है। वो है एप्लास्टिक एनीमिया। तो चलिए फिर शुरू करते हैं और जानते हैं कि एप्लास्टिक एनीमिया क्या होता है? इसके क्या क्या कारण हैं? और इसका इलाज क्या है? एप्लास्टिक एनीमिया:  एप्लास्टिक एनीमिया एक ऐसा अनीमिया है जिसमें कि शरीर के अंदर रक्त कोशिकाओं का निर्माण होना बंद हो जाता है या इतना कम हो जाता है जो शरीर की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी नहीं होता है।  सबसे ज़रूरी सवाल ये है कि ऐसा होता क्यों है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें ये जानना पड़ेगा कि रक्त कोशिकाओं का निर्माण कहाँ होता है और किन परिस्थितियों में ये कम हो जाता है।  अस्थि मज्जा:  रक्त कोशिकाओं का निर्माण हमारे शरीर की अस्थि-मज्जा में होता है।  अस्थि-मज्जा शरीर की बड़ी बड़ी हड्डियों के अंदर मिलता है, ये बच्चों में ज़्यादा होता है और बड़ों में केवल कुछ जगहों पर ही क्रियाशील होता है बाक़ी जगहों पर अस्थि मज्जा की जगह वसा एकत्र हो जाती है। अस्थि मज्जा में रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है एवं वहीं से वो रक्त में मि

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन: जानिए आपकी हेल्थ आईडी क्या काम करेगी?

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  राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन: 15 अगस्त 2020 को लाल क़िले की प्राचीर से जब प्रधानमंत्री मोदी ने देश को संबोधित किया तो उसमें आमजन के स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ योजनाएँ थीं उनमें से एक योजना थी  राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन । चलिए इसके विषय में जानते हैं।  राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत सरकार की योजना है कि तकनीक को स्वास्थ्य योजनाओं में जोड़ा जाए जिससे कि मरीज़ों का रिकॉर्ड रखने में आसानी हो और एक क्लिक पर डॉक्टर जान पाएँ कि मरीज़ को पहले क्या बीमारी थी और उसने कितने समय तक कहाँ कहाँ इलाज लिया।  यह डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जिस पर सभी भारतीय व्यक्तिगत रूप से पंजीकृत होंगे और सभी को यूनिक हेल्थ आईडी प्रदान की जाएगी। हालाँकि ये अभी योजना का प्रारूप है और सरकार जल्द ही इस योजना का शुभारंभ करेगी।  इस प्रणाली के स्तंभ क्या हैं: इस प्रणाली के चार प्रमुख स्तंभ होंगे 1. स्वास्थ्य आईडी, 2. व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड, 3. डिजी डॉक्टर और 4. स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री। स्वास्थ्य आईडी एक डिजिटल "स्वास्थ्य खाता" जैसा होगा जिसमें उपयोगकर्ता के सभी विवरण होंगे जैसे उपयोगकर्ता के व्य